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हिन्दी प्रसारण प्रतिदिन 20 मिनट का होता है जिसमें सन्त पापा के प्रवचनों एवं सन्देशों, कलीसियाई दस्तावेज़ एवं बाईबिल पर आधारित चिन्तन, युवा कार्यक्रम एवं ज्वलन्त सामाजिक मुद्दों पर नाटक और सामयिक लोकोपकारी चर्चा तथा समाचार प्रसारित किये जाते हैं।
 
"हमेशा याद रखें, जो भी मैं आपसे कहता हूं, आप इसे दो तरीकों से ले सकते हैं। आप इसे बस मेरे अधिकार पर ले जा सकते हैं, 'क्योंकि ओशो ऐसा कहते हैं, यह सच होना चाहिए' - तब आप पीड़ित होंगे, तब आप नहीं बढ़ेंगे। "मैं जो भी कहता हूं, उसे सुनो, इसे समझने की कोशिश करो, इसे अपने जीवन में लागू करो, देखो कि यह कैसे काम करता है, और फिर अपने निष्कर्ष पर आओ। वे वही हो सकते हैं, वे नहीं भी हो सकते हैं। वे कभी भी समान नहीं हो सकते क्योंकि आपके पास एक अलग व्यक्तित्व है, एक अद्वितीय व्यक्ति है। ” Visit: https://l ...
 
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प्रेम एक रहस्य है। सबसे बड़ा रहस्य ! रहस्यों का रहस्य ! प्रेम से ही बना है अस्तित्व और प्रेम से ही समझ में आता है। प्रेम से ही हम उतरे हैं जगत में और प्रेम की सीढ़ी से ही हम जगत के पार जा सकते हैं। प्रेम को जिसने समझा उसने परमात्मा को समझा। और जो प्रेम से वंचित रहा वह परमात्मा की लाख बात करे, बात ही रहेगी, परमात्मा उसके अनुभव में न आ सकेगा। प्रेम प…
 
‘ज्यूं था त्यूं ठहराया’, रज्जब का है यह वचन। ओशो जब इस वचन की पर्त-दर-पर्त उघाड़ते हैं तो साथ ही साथ हमारे भी मन की कई जानी-अनजानी पर्तें स्वतः खुलती जाती हैं और हम आश्चर्यचकित रह जाते हैं कि कितना कुछ हमारे मन में हम लिए बैठे हैं और कितना आसान है उसे समझना और उससे बाहर आना। इसी के साथ दस प्रवचनावों में मित्रों द्वारा उठाए गए विभिन्न सवालों के जवाब…
 
मेरा जोर ध्यान पर है। ध्यान का अर्थ है: स्वार्थ, परम स्वार्थ, आत्यंतिक स्वार्थ! क्योंकि ध्यान से ज्यादा निजी कोई बात नहीं है इस जगत में। ध्यान का कोई सामाजिक संदर्भ नहीं। ध्यान का अर्थ है: अपने एकांत में उतर जाना, अकेले हो जाना, मौन, शून्य, निर्विचार, निर्विकल्प।
 
ज्योतिष विज्ञान पर वुडलैंड, मुंबई में प्रश्नोत्तर सहित ओशो द्वारा दिए गए दो प्रवचनों का अप्रतिम संकलन।
 
ज्‍योति से ज्‍योति जले संत सुंदरदास के पदो पर ओशो द्वारा दिए गए प्रथम दस प्रवचनों का संकलन। संत सुंदरदास ने उजाले की इस यात्रा को ‘ज्‍योति से ज्‍योति जले’ कहा है। इस पृथ्‍वी पर एक व्‍यक्ति का दीया जलता है, पूरी पृथ्‍वी उसकी ज्‍योति से प्रकाशित होने लगती है, एक व्‍यक्ति बुद्धत्‍व को उपलब्‍ध होता है, तो हजारों लोगों के जीवन में रसधार प्रवाहित होने लग…
 
जीवन एक रहस्य है। जिसे हम जीवन कहते हैं, जिसे हम जीवन जानते हैं, जैसा जानते हैं, वैसा ही सब कुछ नहीं है। बहुत कुछ है जो अनजाना ही रह जाता है। शायद सब-कुछ ही अनजाना रह जाता है। आप पाएंगे इस लघु पुस्तिका में जीवन के रहस्यों को उदघाटित करने के सूत्र।
 
जीवन को जीओ। जीवन एक अवसर है, उसे चूको मत। उसके उतार-चढ़ाव देखो। उसकी अंधेरी घाटियों में भी उतरो और प्रकाशोज्वल शिखरों पर भी चढ़ो। कांटे भी चुभेंगे, फूल भी हाथ लगेंगे। इन दोनों को भोगो, क्योंकि इन दोनों के भोगने से ही तुम्हारे भीतर आत्मा पैदा होगी। इसी चुनौती में से गुजर कर, इसी आग में से गुजर कर तो आत्मा का जन्म होता है।…
 
कुंडलिनी-योग पर साधना शिविर में हुए ओशो के प्रवचन तथा ध्यान प्रयोग एवं साधना-गोष्ठी के दौरान साधकों के साथ हुई ओशो की अंतरंग वार्ताओं का संकलन।
 
जीवन को सम्‍मान दो, सत्‍कार करो। जीवन उसकी भेंट है और तुम पात्र न थे तो भी तुम्‍हें मिली है। तुम अपात्र हो, फिर भी वह तुम पर बरसा है-झत दसहुं दिस मोती- उसके मोती बरसे ही जाते हैं। तुमने नहीं मांगा, वह तुम्‍हें मिला है। तुम जो नही जानते, वह भी तुम्‍हें मिला है। जिसे पहचानने में तुम्‍हें सदियां लग जाएंगी, वह भी तुम्‍हें मिला है। ऐसा खजाना, जो अकूत है…
 
पहला प्रश्न ‘लोभ’ से शुरू होता है जिसके उत्तर में ओशो कहते हैं कि साधना के मार्ग पर ‘लोभ’ जैसे शब्द का प्रवेश ही वर्जित है क्योंकि यहीं पर बुनियादी भूल होने का डर है। फिर तनाव की परिभाषा करते हुए ओशो कहते हैं : सब तनाव गहरे में कहीं पहुंचने का तनाव है और जिस वक्त आपने कहा, कहीं नहीं जाना तो मन के ‍अस्तित्व की सारी आधारशिला हट गई। फिर क्रोध, भीतर के…
 
जो वीणा से संगीत के पैदा होने का नियम है, वही जीवन-वीणा से संगीत पैदा होने का नियम भी है। जीवन-वीणा की भी एक ऐसी अवस्था है, जब न तो उत्तेजना इस तरफ होती है, न उस तरफ। न खिंचाव इस तरफ होता है, न उस तरफ। और तार मध्य में होते हैं। तब न दुख होता है, न सुख होता है। क्योंकि सुख एक खिंचाव है, दुख एक खिंचाव है। और तार जीवन के मध्य में होते हैं--सुख और दुख …
 
जीवन के विभिन्न पहलुओं पर ओशो द्वारा दिए गए प्रवचन। सत्य की खोज में प्यास पहला चरण है। जीवन को देखने से; जीवन के सत्य के प्रति जागने से प्यास पैदा होती है। जागें और देखें और किसी शास्त्र में खोजने न जाएं, क्योंकि जीवन चारों तरफ है और शास्त्र सब मुर्दा हैं।
 
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